Connect with us
Advertisement

iWorld

AI से बदली राह: जींद का ग्राफिक डिजाइनर बना STAGE का पहला Full Stack Builder, Harvard Business School तक पहुँची कहानी

खुद को समझने से मिली नई दिशा; जिसे आलस समझते थे, वही आदत बनी सुनील की सुपरपावर

Published

on

सुनील मित्तल

नोएडा: OTT प्लेटफॉर्म STAGE में AI अपनाने की पहल ने टीम के लोगों को नई जिम्मेदारियाँ और प्रयोग के मौके दिए हैं। हरियाणा के जींद से आने वाले सुनील मित्तल इसकी एक मिसाल हैं। STAGE में पोस्टर डिजाइन करने वाले सुनील कंपनी के पहले Full Stack Builder बने। इस भूमिका में वे समस्या पहचानने से लेकर उसके समाधान के लिए AI की मदद से पूरा प्रोडक्ट तैयार करने तक की जिम्मेदारी संभालते हैं।

कोडिंग में कभी दिलचस्पी न रखने वाले सुनील अकेले कंपनी के लिए तीन उपयोगी AI प्रोडक्ट्स बना चुके हैं। इस बदलाव की शुरुआत उस आदत से हुई, जिसे वे अपना आलस समझते थे। वे कहते हैं, “बीस मिनट का काम बचाने का तरीका ढूँढने में मैं घंटों लगा सकता था, खासकर अगर वे बीस मिनट रोज बचने वाले हों।”

काम ने जगह दिलाई, भरोसे ने हौसला बढ़ाया

सरकारी स्कूल से पढ़े सुनील ने गवर्नमेंट कॉलेज, जींद में B.Sc. Computer Science शुरू की, लेकिन रुचि न बनने के कारण बीच में ही छोड़ दी। कंप्यूटर और स्केचिंग में रुचि थी। माता-पिता के सहयोग से अपने दिल की सुनी और दिल्ली में VFX कोर्स करने का फैसला किया, जो कोरोना में बीच में छूट गया। इसके बाद पोस्टर डिजाइन और वीडियो एडिटिंग का फ्रीलांस काम उन्हें STAGE तक ले आया।

कंपनी को काम पसंद आया तो फुल-टाइम जुड़ने का प्रस्ताव मिला। सुनील हिचके। अकेले काम करने के आदी थे और लोगों के बीच अपनी बात रखने में मुश्किल महसूस करते थे। करीब दो साल साथ फ्रीलांस काम करने से टीम पर भरोसा बना, तब उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार किया। बाद में नोएडा ऑफिस में सहकर्मियों और फाउंडर्स के प्रोत्साहन से आत्मविश्वास बढ़ा।

AI के साथ प्रयोग और असाधारण चुनौतियाँ

2025 में STAGE ने टीम को AI अपनाने के लिए टूल्स, मार्गदर्शन और प्रयोग के अवसर दिए। इस पहल को आगे बढ़ा रहे शशांक (Co-Founder & CTO, STAGE) का सुनील पर भरोसा था। सुनील के मुताबिक, उनकी एक बात बार-बार हौसला देती थी: “मुझे पता है तू कर लेगा।”

सुनील ने टीम के साथ रोज “AI पे चर्चा” शुरू की। Photoshop में पोस्टर को अलग-अलग साइज में बनाने का काम ऑटोमेट किया तो दो से तीन घंटे का काम पंद्रह-बीस मिनट में होने लगा। STAGE के एक AI हैकाथॉन में उनकी टीम ने एक दिन में ऐसा प्रोटोटाइप बनाया, जो अनुमान लगा सके कि कौन-सा विज्ञापन दर्शकों पर बेहतर असर डाल सकता है। इस प्रोजेक्ट ने पहला स्थान हासिल किया।

इसी दौरान एक जरूरी अभियान के लिए विनय सिंघल (Co-Founder & CEO, STAGE) ने एक दिन में 300 विज्ञापन क्रिएटिव्स बनाने का काम दिया। बिना AI के तब रोज तीन-चार ही बन पाते थे। पहले दिन ठोस नतीजा नहीं निकला। अगले दिन सुनील ने AI की मौजूदा क्षमताओं को ध्यान में रखकर AI असिस्टेंट Claude की मदद से काम का नया तरीका तैयार किया और पूरे 300 क्रिएटिव्स बना दिए। सुनील के मुताबिक, नतीजा देखकर टीम के लोग भी हैरान थे।

अपने आप को जाना तो नई भूमिका का रास्ता मिला

इन नतीजों के बावजूद अगला कदम आसान नहीं था। सुनील बताते हैं कि साल के आखिर में अप्रेजल के समय वे ग्राफिक डिजाइनिंग से आगे बढ़कर पूरी तरह AI की मदद से काम आसान करने पर ध्यान देना चाहते थे, लेकिन मन में कई सवाल थे। कंपनी उन पर नई जिम्मेदारी का भरोसा क्यों करे? पुराना काम कौन संभालेगा? मौका मिला और वे कुछ खास नहीं कर पाए तो?

अपना प्रस्ताव रखने से पहले उन्होंने अपने काम, आदतों और रुचियों पर गौर किया। उन्हें समझ आया कि अपने हर काम में वे समस्याएँ सुलझाना और काम करने के आसान तरीके खोजना पसंद करते थे। AI ने इसी समझ से प्रोडक्ट बनाने का रास्ता खोला।

इस स्पष्टता के साथ उन्होंने नई भूमिका का प्रस्ताव रखा। विनय ने उनकी क्षमता पहचानी, भरोसा किया और कहा, “तू बस उड़ान भर, फ्यूल मैं प्रोवाइड करूँगा।” जनवरी 2026 में STAGE के AI-native बनने के मिशन के तहत वे कंपनी के पहले Full Stack Builder बने।

नई जिम्मेदारी, अपने बनाए प्रोडक्ट्स

नई जिम्मेदारी का पहला काम उनके पुराने सवाल से ही जुड़ा था: ग्राफिक डिजाइनिंग का काम कैसे संभलेगा? इसके लिए उन्होंने AI Designer Tool बनाया। अब STAGE में लोग ग्राफिक डिजाइनर पर निर्भर हुए बिना पोस्टर और ग्राफिक्स बना सकते हैं। फिर Narrative Engine बनाया, जो फिल्म या सीरीज को दर्शकों तक पहुँचाने के अलग-अलग विचार देता है। इन्हें बड़े प्रचार पर खर्च करने से पहले आजमाया जा सकता है।

इसके बाद उन्होंने Antaryami बनाया। कंपनी के मुताबिक, यह पूरी फिल्म या सीरीज को कुछ ही मिनटों में बारीकी से समझता है। कंटेंट की यह जानकारी STAGE को अपने दर्शकों की पसंद बेहतर समझने और उनके हिसाब से खास अनुभव देने में मदद करती है। पहले पूरा कंटेंट देखकर ही हो सकने वाले कामों को ऑटोमेट करने के रास्ते भी खुले हैं। STAGE के दूसरे AI प्रोडक्ट्स भी इसकी समझ का इस्तेमाल करते हैं। इन प्रोडक्ट्स को बनाने के लिए सुनील ने कोई नया कोडिंग कोर्स नहीं किया; बनाते हुए सीखते गए।

Harvard Business School के प्रोफेसरों से बातचीत

STAGE की AI-native बनने की यात्रा में सुनील के योगदान को लेकर Harvard Business School के प्रोफेसरों ने उनका इंटरव्यू लिया। सुनील बताते हैं कि घबराहट में शब्द अटक रहे थे, लेकिन उनके काम को सराहा गया। कभी ऑफिस में लोगों के बीच काम करने से हिचकने वाले सुनील अब अपनी बनाई चीजों की कहानियाँ साझा कर रहे थे।

आगे वे उपयोगी प्रोडक्ट्स बनाने के सफर को जारी रखने के साथ AI से वीडियो गेम्स और एनिमेटेड सीरीज बनाने के अपने बचपन के सपनों पर काम करना चाहते हैं।

कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ विनय सिंघल ने बताया, “सुनील की कहानी बताती है कि STAGE में हम सिर्फ रोल नहीं देते, भरोसा देते हैं। एक ग्राफिक डिजाइनर से कंपनी का पहला Full Stack Builder बनना — यह दिखाता है कि सही मौका और सही सपोर्ट मिलने पर हमारी टीम क्या कर सकती है।”

इस सफर की शुरुआत को याद करते हुए सुनील माता-पिता के साथ को खास अहमियत देते हैं। जब उनके दोस्त सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे, तब उन्होंने क्रिएटिव क्षेत्र में अपना रास्ता चुना। माता-पिता ने उनकी पसंद पर भरोसा किया। आज अपने काम के बदलते मायने पर वे कहते हैं, “पहले अपना समय बचाने के लिए सोचता था, अब पूरी टीम का समय और मेहनत बचाने के तरीके सोच पाता हूँ।”

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement News18
Advertisement
Advertisement Whtasapp
Advertisement Year Enders

Indian Television Dot Com Pvt Ltd

Signup for news and special offers!